
दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को 2017 के उन्नाव दुष्कर्म मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे पूर्व भाजपा नेता कुलदीप सिंह सेंगर कीसजा को अपील लंबित रहने तक निलंबित कर दिया और दिल्ली में रहने समेत कई सख्त शर्तों के साथ जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है।हालांकि सेंगर अभी जेल से बाहर नहीं आ सकेगा। पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के मामले में 10 साल की सजा पर उसकी याचिका लंबित हैजिसकी सुनवाई 16 जनवरी 2026 को होनी है। नाबालिग से दुष्कर्म में उम्रकैद की सजा निलंबित होने की सूचना पर जहां पूर्व विधायक का खेमाखुश है, वहीं मामले की जानकारी होते ही पीड़िता अपनी मां के साथ दिल्ली के इंडिया गेट पर धरना देने के लिए बैठ गई। इसकी जानकारी पुलिसपहुंची और दोनों को जबरन वहां से उठा दिया। दुष्कर्म पीड़िता का कहना है कि सेंगर बाहर आया दोबारा इसी जगह पर धरना देगी।
हत्या के मुकदमे में तीन मार्च 2020 को दस साल की सजा हुई
मालूम हो कि गांव में रहने वाली नाबालिग ने वर्ष 2017 में तत्कालीन विधायक कुलदीप सेंगर पर दुष्कर्म की शिकायत की थी। लंबी कानूनी लड़ाईके बाद पीड़िता और परिवार की सुनवाई हुई थी। अप्रैल 2018 को प्रदेश सरकार की संस्तुति पर केंद्र सरकार ने प्रकरण की सीबीआई जांच की करानेकी मंजूरी दी। सीबीआई ने रिपोर्ट दर्ज कर 13 अप्रैल 2018 की उसे लखनऊ स्थित आवास से गिरफ्तार किया था। लंबी जांच और दिल्ली की तीसहजारी कोर्ट में मुकदमे की सुनवाई के बाद 16 दिसंबर 2019 को कोर्ट में मुकदमे की सुनवाई पूरी हुई और न्यायालय ने कुलदीप को नाबालिग सेदुष्कर्म का दोषी पाया। 20 दिसंबर 2019 को न्यायालय ने कुलदीप को उम्रकैद की सजा और 25 लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई थी। इसकेबाद उनकी विधानसभा से सदस्यता खत्म हो गई थी। बाद में कुलदीप व छोटे भाई अतुल को पीड़ित किशोरी के पिता की हत्या के मुकदमे में तीनमार्च 2020 को दस साल की सजा हुई थी।
जमानत पर चल रहे लोग खुले आम धमका रहे
छह साल से दिल्ली की तिहाड़ जेल में सलाखों के पीछे रह रहे कुलदीप को न्यायालय ने 15 लाख के निजी मुचलके कई शर्तों के साथ सजा कोनिलंबित किया है। हालांकि कुलदीप ने सजा के खिलाफ अपील की है। इसकी सूचना मिलते ही परिवार और कुछ समर्थक मंगलवार की दोपहर हीदिल्ली पहुंच गए। कुलदीप सेंगर की मौसी सरोज सिंह ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि मेरे बेटे को न्यायालय ने राहत दी है इसके लिए न्यायालयऔर ईश्वर का आभार जताया है। बताया कि मेरे बेटे को साजिशन फंसाया गया था। वह इस तरह का गलत काम नहीं कर सकते जिसमें उन्हें सजा हुई।वह भी गांव की बेटी को वह बेटी की तरह मानते थे। मौसी का कहना है कि कुलदीप चार बार विधायक रहे हैं। राजनीतिक प्रतिद्वंदिता में बड़ी साजिशरचकर उन्हें फंसाया गया। न्यायालय और ईश्वर पर पूरा विश्वास है। पीड़िता की बहन ने आरोप लगाया कि कुलदीप सेंगर ने मेरे बड़े पापा को फिर पिताको मरवाया इसके बहन के साथ गलत काम किया। इसके बाद भतीजी (दुष्कर्म पीड़िता) के लिए न्याय की लड़ाई लड़ने वाले चाचा को झूठे केस मेंफंसाकर जेल भिजवाया। बहन ने बताया कि अभी कुलदीप जेल से बाहर नहीं आए इससे पहले ही उनके लोग धमकियां देने लगे हैं अब खतरा मंडरारहा है। पिता की हत्या में पहले से जमानत पर चल रहे लोग खुले आम धमका रहे हैं।