
असम में जोरदार घमासान की तैयारी है। घुसपैठ का मुद्दा यहां बड़ा बनता दिख रहा है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा इसे जोरशोर से उठा रहे हैं। वहीं, कांग्रेस को हिमंत के रुख से खुद का फायदा होता दिख रहा है। कहा जा रहा है कि घुसपैठियों को बाहर करने का मुद्दा भाजपा के पक्ष में असम मूल केलोगों को कर सकता है। डेमोग्राफी बदलने के खतरे का मुद्दा भी भाजपा उठा रही है। कांग्रेस को भाजपा के 15 साल के शासन से उपजी सत्ता विरोधीलहर से जीत मिलने की उम्मीद है।
राज्य में भाजपा 126 में से 89 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। 37 सीट पर सहयोगी दल बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट और यूपीपीएल लड़ेंगे। भाजपा ने मौजूदा19 विधायकों टिकट काट दिया है। इनमें राज्य मंत्री नंदिता गारलोसा शामिल हैं। टिकट कटने पर गारलोसा कांग्रेस में चली गई हैं। गारलोसा अबहाफलांग सीट से कांग्रेस टिकट पर चुनाव लड़ेंगी। कांग्रेस के भी कई नेता भाजपा में आ गए हैं। इनमें प्रद्युत बोरदोलोई, भूपेन बोरा, नवज्योतितालुकदार शामिल हैं।
समीकरण बनाएंगे, बिगाड़ेंगे
पिछले चुनावों में ऊपरी असम में भाजपा काफी मजबूत रही है। निचले असम में कांग्रेस और एआईयूडीएफ से मुकाबला होता है। बराक घाटी मेंस्थिति थोड़ी भिन्न रहती है। हालांकि, इस बार चुनाव परिसीमन के बाद हो रहा है। इसलिए समीकरण बदल गए हैं। जहां तक बात मुद्दों की है तोअसम में बेरोजगारी का मुद्दा काफी बड़ा है। लोगों को रोजगार चाहिए। कांग्रेस इस मुद्दे पर जोर दे रही है। असमिया पहचान और अवैध प्रवासन भी बड़ेमुद्दों में शामिल है। बाढ़ और पुनर्वास, एनआरसी को लेकर जनता के बीच में चर्चा है। राज्य में राज्य सरकार का कामकाज, प्रशासन और भ्रष्टाचार भीबड़ा मुद्दा है। असम के चाय बगानों की समस्या, श्रमिकों की समस्या, बाल विवाह, बेदखली, गायक जुबिन की मृत्यु का ममला जैसे मुद्दे भी वोटों कासमीकरण बनाएंगे, बिगाड़ेंगे.