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22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले के बाद भारतीय सेना ने असाधारण साहस और रणनीतिक दक्षता का परिचयदेते हुए बड़ा सैन्य अभियान चलाया। “ऑपरेशन सिंदूर” नामक इस जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में स्थितआतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया गया और उन्हें पूरी तरह नष्ट कर दिया गया।

पाकिस्तानी जवाब का करारा प्रतिकार
पाकिस्तान द्वारा की गई जवाबी सैन्य कार्रवाई की कोशिशों को भारतीय सेना ने कठोर प्रतिशोध के साथ विफल कर दिया। रविवार को जारी किए गएवीडियो में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि भारतीय सशस्त्र बलों ने आतंकियों के लॉन्चिंग पैड्स और पाकिस्तानी सेना की चौकियों को बेहद सटीकहमलों में ध्वस्त कर दिया। वेस्टर्न कमांड द्वारा साझा किए गए इस फुटेज में बताया गया कि यह कार्रवाई प्रतिशोध नहीं बल्कि न्याय के सिद्धांतों परआधारित थी। सेना ने दोटूक शब्दों में कहा—“ऐसा सबक दिया गया है, जिसे आने वाली पीढ़ियां भी याद रखेंगी।”

राजनीतिक और कूटनीतिक सोच में बदलाव
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने “ऑपरेशन सिंदूर” की प्रशंसा करते हुए इसे न केवल एक सैन्य उपलब्धि, बल्कि भारत की बदली हुई राजनीतिक औरकूटनीतिक रणनीति का प्रतीक बताया। “कश्मीर क्रॉनिकल्स” पुस्तक के विमोचन के अवसर पर उन्होंने कहा कि सिंधु जल संधि जैसे फैसले उस समयपाकिस्तान को संतुष्ट करने की नीति का हिस्सा थे, लेकिन अब भारत ने अपनी सुरक्षा नीतियों में व्यापक और निर्णायक बदलाव किए हैं।

प्रधानमंत्री की नेतृत्व शैली का असर
डॉ. सिंह ने यह भी रेखांकित किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सशस्त्र बलों को समय और परिस्थिति के अनुसार स्वतंत्र रूप से कार्रवाई करनेकी पूरी छूट दी गई है—जो पहले की सरकारों से एक बड़ा बदलाव है। “ऑपरेशन सिंदूर” इसी नई सैन्य सोच और स्पष्ट राजनीतिक इच्छाशक्ति कापरिणाम है, जिसने दुश्मन को ऐसी चोट दी है जिसे वह लंबे समय तक भूल नहीं पाएगा।


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