सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को पेगासस मामले में सुनवाई के दौरान इस बात पर हैरानी जताई कि अगर सरकार आतंकियों की जासूसी करा रही हैं तोइसमें गलत क्या है साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वे ऐसी किसी भी रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं करेंगे जो देश की सुरक्षा और संप्रभुता से जुड़ी हो. सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि वे ऐसी किसी भी रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं करेंगे. जो देश की सुरक्षा और सुप्रभुता से जुड़ी हो हालांकि उन्होंने संकेतदिए कि वे निजता के उल्लंघन की व्यक्तिगत आशंकाओं पर विचार कर सकता है. जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कहाकि तकनीकी समिति की रिपोर्ट पर सड़कों पर चर्चा नहीं होनी चाहिए. एक याचिकाकर्ता की तरफ से पेश हुए वकील दिनेश द्विवेदी ने सुनवाई केदौरान कहा कि सवाल ये था कि क्या सरकार के पास स्पाइवेयर सॉफ्टवेयर है और क्या वह इसका इस्तेमाल कर सकती है अगर सरकार के पास ये हैतो कोई भी उन्हें इसका इस्तेमाल करने से नहीं रोक सकता. इस पर पीठ ने कहा कि ‘अगर देश आतंकियों के खिलाफ स्पाइवेयर का इस्तेमाल कर रहाहै तो इसमें गलत क्या है स्पाइवेयर रखना गलत नहीं है ये किसके खिलाफ इस्तेमाल हो रहा है सवाल इसका है देश की सुरक्षा से समझौता नहीं कियाजा सकता आम नागरिकों का संविधान के तहत निजता का अधिकार सुरक्षित किया जाएगा.
जो देश की संप्रभुता से जुड़ी होगा उसे छुआ नहीं जाएगा
इसको लेकर पीठ ने कहा कि कोई भी रिपोर्ट जो देश की सुरक्षा और संप्रभुता से जुड़ी हो उसे छुआ नहीं जाएगा. लेकिन व्यक्तिगत तौर पर अगर कोईयह जानना चाहता है कि वह रिपोर्ट में शामिल है या नहीं उसे इसकी जानकारी दी जा सकती है. लेकिन रिपोर्ट को ऐसा दस्तावेज नहीं बनाया जाएगाकि सड़कों पर भी इसकी चर्चा हो. अदालत ने कहा कि वे इस बात की जांच करेंगे कि किस हद तक तकनीकी समिति की रिपोर्ट को संबंधित व्यक्तिके साथ साझा किया जा सकता है. इसके बाद पीठ ने मामले पर सुनवाई 30 जुलाई तक के लिए टाल दी. पेगासस एक इस्राइली सॉफ्टवेयर है जिसेमोबाइल फोन को हैक कर निगरानी के लिए इस्तेमाल किया जाता है। 2021 में कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि भारत में कईपत्रकारों, नेताओं, और सामाजिक कार्यकर्ताओं के फोन की जासूसी की गई थी. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की स्वतंत्र जांच के आदेश दिएथे. साल 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने पेगासस मामले की जांच के लिए एक तकनीकी समिति और एक निगरानी समिति बनाई थी. वहीं इस जांच कीनिगरानी पूर्व न्यायाधीश आर वी रवींद्रन कर रहे हैं जिनकी सहायता पूर्व आईपीएस अधिकारी आलोक जोशी और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ संदीपओबेरॉय कर रहे हैं.