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कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने राज्यसभा में एक महत्वपूर्ण बयान देते हुए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और केंद्र सरकार पर निशाना साधा।उन्होंने कर्नाटक में चल रही फोरलेन रोड परियोजना के संबंध में सरकार की नीयत और योजनाओं पर सवाल उठाए। खरगे ने कहा कि कर्नाटक केप्रमुख शहरों को जोड़ने वाली फोरलेन रोड परियोजना पर सरकार का काम धीमा है और इस पर कोई ठोस प्रगति नहीं हो रही है।

कर्नाटक में फोरलेन रोड परियोजना की धीमी प्रगति
खरगे ने राज्यसभा में बोलते हुए कहा कि कर्नाटक में जो फोरलेन रोड परियोजना है, जिसमें गुलबर्गा से बेंगलुरु, सोलापुर से बेंगलुरु और बीदर सेबेंगलुरु को जोड़ने वाली प्रमुख सड़कें शामिल हैं, उन पर काम बहुत धीमा हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन परियोजनाओं का काम लगातारपीछे जा रहा है और इसकी वजह केंद्र सरकार की नीतियां और योजनाएं हैं।
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, “कर्नाटक में जो फोरलेन रोड है – गुलबर्गा से बेंगलुरु, सोलापुर से बेंगलुरु और बीदर से बेंगलुरु को जाती है, इस पर काम आगेनहीं बढ़ रहा है।” उनका यह बयान उस समय आया है जब कर्नाटक राज्य में सड़कों और बुनियादी ढांचे के विकास को लेकर जनता में असंतोष बढ़ताजा रहा है।

पीएमओ से नेशनल हाइवे का नंबर लेने की प्रक्रिया
मल्लिकार्जुन खरगे ने आगे कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि नेशनल हाइवे का नंबर लेने के लिए पीएमओ (प्रधानमंत्री कार्यालय) तक जाना पड़ताहै। उन्होंने कहा, “मुझे जानकारी मिली है कि नेशनल हाइवे का नंबर लेने के लिए भी PMO जाना पड़ता है- अगर ये बात सही नहीं है तो मंत्री जीइसका खंडन कर सकते हैं।”
इस बयान में खरगे ने केंद्र सरकार के कामकाज की गति और पारदर्शिता पर सवाल उठाए। उनका आरोप था कि सरकार का केंद्रीयकरण इतना ज्यादाहो चुका है कि महत्वपूर्ण निर्णय लेने के लिए भी स्थानीय प्रशासन को प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) से मंजूरी की जरूरत होती है। खरगे ने यह भीकहा कि अगर यह जानकारी गलत है, तो संबंधित मंत्री इसे खंडन कर सकते हैं, लेकिन उन्होंने इसे गंभीरता से उठाया।

फंड की कमी और जमीन के मुद्दे पर टिप्पणी
इसके बाद खरगे ने आरोप लगाया कि सरकार के पास फंड की कमी है, और अंत में यह बहाना बनाकर काम में विलंब किया जा रहा है कि जमीन दीजाए तो काम शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा, “सच्चाई ये है कि इनके पास फंड नहीं है और फिर आखिर में बहाना बनाते हैं कि आप हमें जमीन दो, हम काम करेंगे।”
कांग्रेस अध्यक्ष ने यह बयान सरकार के उस तर्क पर भी चोट की, जिसमें कहा गया था कि यदि उन्हें परियोजनाओं के लिए जमीन मिलती है, तो वेकाम शुरू कर सकते हैं। खरगे ने यह दावा किया कि जमीन मिलना एक जटिल और लंबी प्रक्रिया है, लेकिन इस समस्या को पूरी तरह से नजरअंदाजकिया जा रहा है।

केंद्र सरकार की नीति पर सवाल
खरगे ने केंद्र सरकार की नीति और नीतिगत दिशा पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि सरकार को यह पता है कि जमीन मिलना आसान कामनहीं है, और जब जमीन मिलती है तो वह भी उस पर काम शुरू नहीं किया जा रहा है। उनका यह बयान कर्नाटक में बुनियादी ढांचे के विकास में हो रहीदेरी को लेकर था। खरगे ने केंद्र सरकार पर यह आरोप भी लगाया कि सरकार को एक ठोस योजना बनाने और उन योजनाओं को जमीन पर उतारने कीबजाय वे सिर्फ वादे करती रहती है।

कर्नाटक में कांग्रेस का रुख
कर्नाटक में कांग्रेस पार्टी की सरकार बनने के बाद से यह मुद्दा प्रमुख चर्चा का विषय बन चुका है। राज्य में बीजेपी की सरकार के कार्यकाल में कईप्रमुख बुनियादी ढांचे के प्रोजेक्ट धीमी गति से चल रहे थे, और कांग्रेस ने इस मुद्दे को अपनी चुनावी रणनीति का हिस्सा बनाया था। मल्लिकार्जुनखरगे का यह बयान उसी क्रम में आता है, जब कर्नाटक में सड़कों, पुलों और अन्य बुनियादी ढांचों को लेकर लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने केंद्र सरकार की कार्यशैली पर यह आरोप भी लगाया कि सरकारी योजनाओं की समय सीमा और परिणामों के बारे में कोई स्पष्टतानहीं है। उनकी ओर से यह भी स्पष्ट संदेश था कि सरकार के पास न तो पैसा है, न योजना और न ही राजनीतिक इच्छाशक्ति, जिससे राज्य के विकासकार्यों में गति लाई जा सके।

बीजेपी का जवाब
हालांकि मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद बीजेपी की ओर से भी जवाब आने की संभावना है। बीजेपी ने पहले भी कांग्रेस द्वारालगाए गए आरोपों का खंडन किया है और कहा है कि केंद्र सरकार कर्नाटक सहित पूरे देश में बुनियादी ढांचे के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। बीजेपीका यह भी कहना है कि केंद्रीय योजनाओं के तहत कर्नाटक को पर्याप्त राशि दी जा रही है, और कोई भी मुद्दा जमीन से जुड़ा हो, तो उसे स्थानीयप्रशासन और राज्य सरकार के साथ मिलकर हल किया जा रहा है।

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