
बिहार के बाद सभी राजनीतिक दलों की निगाहें पश्चिम बंगाल और यूपी चुनावों पर हैं, लेकिन कांग्रेस एक बार फिर चुनावों की तैयारी में फिसड्डीसाबित होती दिख रही है। देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश में पार्टी अब तक अपना संगठन भी नहीं बना पाई है। किसी भी पार्टी संगठन के लिएमहत्त्वपूर्ण प्रदेश कार्यकारिणी का भी अब तक गठन नहीं किया जा सका है। एसआईआर के लिए पार्टी सभी बूथों पर अपने बीएलए तक नहीं दे पाईहै। ऐसी परिस्थिति में संगठन की कमजोरी यूपी चुनाव में कांग्रेस पर फिर भारी पड़ सकती है।
‘वोट चोरी’ का आरोप लगाते हुए राहुल गांधी ने हरियाणा चुनाव में धांधली होने की बात कही थी, लेकिन कांग्रेस की हार की एक बड़ी वजह राज्य मेंपार्टी संगठन का न होना बताया गया था। कांग्रेस ने हरियाणा में लंबे समय तक अपने जिलाध्यक्ष से लेकर मंडल अध्यक्ष तक नियुक्त नहीं किए थेजिससे पार्टी चुनावी लड़ाई पूरी मजबूती से नहीं लड़ पाई और भाजपा बाजी मार ले गई। वही परिस्थिति एक बार फिर उत्तर प्रदेश में बनती हुई दिखाईदे रही है।
पदाधिकारियों की नियुक्ति करनी
अगस्त 2023 में अजय राय को उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। इसके बाद प्रदेश अध्यक्ष और महासचिव अविनाशपांडेय ने सौ दिनों के अंदर पार्टी संगठन बना लेने की बात कही थी। लेकिन संगठन की कमजोरी के कारण पार्टी लंबे समय तक जिलाध्यक्ष तक नहींबना पाई। इसके पीछे प्रदेश अध्यक्ष अजय राय और केंद्रीय इकाई के बीच सहमति न बन पाना बताया गया था। कहा तो यहां तक जाता है किकेंद्रीय नेतृत्व की सुस्ती से नाराज अजय राय अपने पद से इस्तीफा तक देने के लिए तैयार हो गए थे। फिलहाल, इन सारी परेशानियों से गुजरते हुएपार्टी ने 20 मार्च 2025 को ही अपने जिलाध्यक्षों की घोषणा कर पाई। लेकिन इसके नीचे संगठन निर्माण पूरी तरह सुस्त पड़ा हुआ है। पार्टी सूत्रोंका दावा है कि जिलाध्यक्षों की नियक्ति के बाद जून से ही पार्टी में ‘संगठन सृजन अभियान’ चलाया जा रहा है। इसके अंतर्गत ब्लॉक, मंडल से लेकरबूथ स्तर तक के पदाधिकारियों की नियुक्ति करनी है, लेकिन यह पूरी कवायद कागजों तक सीमित है। ज्यादातर जगहों पर निचले स्तर केपदाधिकारियों की नियुक्ति नहीं हो पाई है।
कार्यकर्ताओं के न होने के कारण उन्हें निचले स्तर तक नहीं ले जाया जा रहा
कुछ जगहों पर केवल खानापूर्ति के लिए कागजों पर नियुक्ति कर दी गई है, लेकिन जमीन पर पार्टी का कोई कार्यकर्ता मौजूद नहीं है। निचले स्तर परसंगठन न होने का सबसे बड़ा प्रमाण यही है कि पार्टी प्रदेश के सभी बूथों पर अपने बीएलए तक नहीं दे पाई है। यूपी में 1.60 लाख के करीब बूथ हैं।इससे पार्टी की चुनावी तैयारियों को गहरा झटका लग रहा है, लेकिन इसकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। कांग्रेस के एक नेता ने दावा किया कि राहुलगांधी के अभियानों को प्रदेश संगठन से कोई सहयोग नहीं मिल रहा है। राहुल गांधी चुनावों में धांधली सहित कई महत्त्वपूर्ण अभियान शुरु कर चुके हैं।नेता के अनुसार, यदि इन मुद्दों को जनता के बीच ले जाया जाए तो इसका लाभ मिल सकता है, लेकिन पार्टी के कार्यकर्ताओं के न होने के कारण उन्हेंनिचले स्तर तक नहीं ले जाया जा रहा है। इससे इन अभियानों का कोई सार्थक परिणाम निकलने की उम्मीद नहीं है।